In this blog I'm going to tell you a Hindi poem that I have written.Tittle of this poem is Sanik ki veer gati which means "Soldier's heroism".I'm dedicating this Hindi poem to army personnel..hope you will not only read poem but also the feeling that I have expressed through words. सैनिक की वीरगति माँ!मुझे न कर्ज चुकाना है, तेरी गोद में सर रख मर जाना है। जब मेरी हल्की सी जान अटकी हो, मेरे मन में कोई बात न शेष खटकी हो। तब तू मुझे अपनी आंचल से होंके, और जान निकले इस शीतल झोंके। माँ!तेरा ऋण मैं न चुका पा रहा हूँ, पर धरती के ऋण से उऋण हो जा रहा हूँ। हे मुन्शी!इस कर्ज का इतना ब्याज बढ़ाना, की हर जन्म बेटा मुझे इस माँ का बनाना। हाँ,माँ एक बात और बताना है, तुझे पता है,एक वीर चक्र अपने घर आना है। उसे घर के हाॅल में सजाना, पर मेरी फोटो साथ न लगाना। सही समय पर खा लूँगा खाना, फोन कर वहां न धमकाना। तू देगी न माँ,इसलिए बिन आज्ञा लिए अब अनंत की ओर चलता हूँ। अब नम आखों से ही सही बस एक बार मुस्करा दें, इस ऋणी जीवन में एक अंतिम सुख और दिला दें। .......... इस वीरता ...
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